डोंगरगढ़ ट्रस्ट और गोंड समाज विवाद:  ‘ख़रीदे हुए आदिवासियों’ से प्रेस कॉन्फ़्रेंस करवाने का बड़ा खुलासा

डोंगरगढ़. धर्मनगरी डोंगरगढ़ का माहौल एक बार फिर गर्म है. मां बम्लेश्वरी मंदिर, जो सदियों से आस्था का केंद्र रहा है, अब आरोपों और प्रत्यारोपों के जाल में फंस गया है. बीती नवरात्र की पंचमी से शुरू हुआ विवाद अब एक संगठित साज़िश की शक्ल लेता जा रहा है. गोंड समाज का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट समिति “मूलनिवासियों की आवाज़ दबाने और समाज को बांटने” का षड्यंत्र रच रही है. (डोंगरगढ़ ट्रस्ट और गोंड समाज विवाद)


पंचमी पूजा के दिन गर्भगृह में आंगादेव और ट्रस्ट का निर्माण करने वाले राजपरिवार के राजकुमार के प्रवेश को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है. गोंड समाज का कहना है कि मंदिर परंपरा में हमेशा से उनका स्थान रहा है, लेकिन ट्रस्ट समिति अब “आस्था को रसूख में बदलने” की कोशिश कर रही है. गोंड समाज का मानना है कि आंगादेव स्वयं भगवान का स्वरूप हैं और माता बमलाई राजकुमार भवानीबहादुर की कुल देवी हैं. ऐसे में ट्रस्ट इन दोनों पर कार्यवाही करने के लिए दबाव बना रही हैं और षड्यंत्र रच रही है , जबकि भक्त और भगवान पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती. गोंड महासभा के अध्यक्ष रमेश उइके ने तीखे शब्दों में कहा- “सबसे पहले ट्रस्ट समिति ने सर्व हिंदू समाज के नाम पर गोंड समाज का विरोध करवाया. जब बात नहीं बनी, तो अब उन्होंने कुछ ‘ख़रीदे हुए आदिवासी’ सामने ला दिए हैं, ताकि भ्रम फैलाया जा सके.”

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