सुकमा। नक्सल प्रभावित इलाकों में अब शिक्षा का माहौल तेजी से मजबूत हो रहा है। शासन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सलवा जुडूम के दौर में बंद हुए सुकमा जिले के सभी स्कूलों को फिर से शुरू कर दिया गया है और अब एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जो नक्सली प्रभाव के कारण बंद हो।
वर्ष 2006 में नक्सली गतिविधियों के चलते 123 स्कूल बंद हो गए थे, जिनमें अधिकांश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय शामिल थे। प्रशासन के लगातार प्रयासों से इन सभी को दोबारा संचालित किया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिली है।
दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए आवासीय सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है। जिले में 16 पोटा केबिन संचालित हैं, जहां हजारों छात्र अध्ययन कर रहे हैं, जबकि छात्रावासों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं लाभान्वित हो रहे हैं।
नियद नेल्लानार योजना के तहत चयनित गांवों में नए स्कूल खोले जा रहे हैं। हाल ही में 7 नए प्राथमिक विद्यालय शुरू किए गए हैं, जिनमें सैकड़ों बच्चों ने दाखिला लिया है। इसके अलावा 19 और स्कूल खोलने की योजना पर काम चल रहा है।
इन प्रयासों से न केवल शिक्षा का विस्तार हो रहा है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भरोसा और विकास की नई उम्मीद भी मजबूत हो रही है। अब इन इलाकों में बंदूक की आवाज की जगह बच्चों की पढ़ाई की गूंज सुनाई दे रही है।