छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। राज्य के पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा छापी गई 2024-25 सत्र की हजारों स्कूली किताबें कबाड़ के रूप में बेची गईं हैं। इस गंभीर मामले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक सहित कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला तब सामने आया जब राजधानी रायपुर के सिलयारी स्थित रियल बोर्ड पेपर मिल में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बड़ी मात्रा में स्कूली किताबें बरामद कीं। इन किताबों को छात्रों को बांटने की बजाय रद्दी में बेच दिया गया था। यह घटना तब हुई जब नई शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी थी और छात्रों को इन किताबों की सख्त जरूरत थी।
सरकार की कार्रवाई
इस घटना के प्रकाश में आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से संज्ञान लिया और अपर मुख्य सचिव रेणु पिल्ले को इस मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके अलावा, स्कूल शिक्षा विभाग के जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर पाठ्यपुस्तक प्रभारी प्रमोद अमर बेल एक्का, भृत्य अजीत गुप्ता और सूरजपुर डीईओ कार्यालय में पदस्थ भृत्य जितेन्द्र साहू को भी निलंबित किया गया।
भ्रष्टाचार का आरोप
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इन अधिकारियों ने इन किताबों को बेचकर मोटी रकम कमाई होगी। यह मामला शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा असर
इस घटना का सीधा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। हजारों छात्रों को नई किताबें नहीं मिल पाईं, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित हुई। यह घटना शिक्षा के अधिकार के उल्लंघन का भी मामला है।