शिक्षा व्यवस्था पर विधानसभा में हंगामा: घटिया प्रश्न पत्र, शिक्षकों की कमी और स्कूल मर्जर पर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शून्यकाल में स्कूल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बालोद जिले में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान अव्यवस्थाओं की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने कहा कि पांचवीं और आठवीं के छात्रों को बेहद खराब गुणवत्ता के प्रश्न पत्र दिए जा रहे हैं। कागज इतना पतला और कमजोर है कि हाथ में लेते ही फट जा रहा है, और एक तरफ लिखा जवाब दूसरी तरफ से साफ दिखाई देता है।

संगीता सिन्हा ने इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही बताते हुए कहा कि गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय के प्रश्न पत्र की गुणवत्ता भी बेहद निम्न स्तर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस एजेंसी को पेपर छपाई की जिम्मेदारी दी गई है, वहां बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा शुरू होने के बावजूद छात्रों को अभी तक पूरी किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

विधायक ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार 33 हजार भर्तियों की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर एक भी नई भर्ती नहीं हुई है। कई स्कूलों में केवल एक या दो शिक्षक हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अपने दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक स्कूल में बच्चे खुद झाड़ू लगाते मिले, जबकि शिक्षक मीटिंग में गए थे।

इसके अलावा, युक्तियुक्तकरण के तहत स्कूलों के मर्जर पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि बॉयज और गर्ल्स स्कूलों को एक साथ करने से बच्चियों को दूर जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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