Eid 2026 : शनिवार को ईद-उल-फितर का पर्व पूरे देश में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। रमजान के पूरे महीने रोजा रखने के बाद यह दिन मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। इसे ‘मीठी ईद’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस मौके पर लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं और अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं।
सुबह से ही ईद की तैयारियों का माहौल देखने को मिला। लोग स्नान कर नए या साफ कपड़े पहनकर, इत्र लगाकर ईदगाह और मस्जिदों की ओर नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज के बाद सभी ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। कई स्थानों पर नमाज के बाद अलग रास्ते से घर लौटने की परंपरा भी निभाई गई।
नमाज से पहले फितरा देना जरूरी
रमजान के समापन के साथ ही जकात-उल-फितर देने की परंपरा निभाई जाती है। इसे नमाज से पहले अदा करना आवश्यक माना गया है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना होता है, ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। कई लोग मस्जिदों या सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से यह दान करते हैं।
ईद-उल-फितर इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाई जाती है और इसकी तिथि चांद दिखाई देने पर निर्भर करती है। इसी कारण अलग-अलग देशों में यह त्योहार एक-दो दिन के अंतर से मनाया जाता है। आमतौर पर ईद का उत्सव दो से तीन दिनों तक चलता है।
इतिहास के अनुसार, ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा पैगंबर हजरत मोहम्मद ने मदीना में शुरू की थी, जब मुसलमानों ने पहली बार रमजान के रोजे पूरे किए थे।

