छत्तीसगढ़ के शहरों के बाहरी इलाकों (Outskirts) में ‘फार्म हाउस’ के नाम पर एक नया और अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जिन जमीनों पर प्रशासन से केवल खेती और बागवानी की अनुमति ली गई है, वहां अब आलीशान रिसॉर्ट्स की तरह जश्न का धंधा चल रहा है। इन फार्म हाउसों को निजी पार्टियों, बर्थडे और शादियों के लिए भारी किराए पर दिया जा रहा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर शराब और हुक्का खुलेआम परोसा जा रहा है।
कैसे चल रहा है यह खेल?
शहर की भीड़भाड़ से दूर होने के कारण ये फार्म हाउस रसूखदारों और युवाओं की पहली पसंद बन गए हैं।
• किराये का खेल: एक रात के लिए इन फार्म हाउसों का किराया ₹10,000 से लेकर ₹50,000 तक वसूला जा रहा है।
• अवैध सुविधाएं: आयोजक यहां बिना किसी आबकारी लाइसेंस के बार काउंटर सजा रहे हैं। हुक्का पॉट और नशीले पदार्थों की मौजूदगी की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।
• शोर-शराबा: देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजने से आसपास के ग्रामीण और वन्यजीव भी परेशान हैं।
नियमों की धज्जियाँ
नियमों के मुताबिक, कृषि भूमि पर बने फार्म हाउस का व्यावसायिक उपयोग (Commercial Use) बिना डायवर्सन के नहीं किया जा सकता। लेकिन:
1. सुरक्षा का अभाव: यहां न तो फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं और न ही कोई सुरक्षा गार्ड।
2. पुलिस की नजर से दूर: शहर से बाहर होने के कारण पुलिस की गश्त यहां कम होती है, जिसका फायदा संचालक उठाते हैं।
3. कर चोरी: बिना किसी बिल या रिकॉर्ड के यह पूरा कारोबार कैश में चल रहा है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।
प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब इन फार्म हाउसों की सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम इन ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी में है।