बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले में आरोपी पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को हाईकोर्ट से झटका लगा है। जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की सिंगल बेंच ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले ईओडब्ल्यू-एसीबी की विशेष कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका को अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए नामंजूर कर दिया था।
क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने नान घोटाले में पूर्व आईएएस डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, सतीश चंद्र वर्मा और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
EOW के आरोप क्या हैं?
- आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा ने पद का दुरुपयोग कर महाधिवक्ता वर्मा से लाभ लिया।
- तीनों ने मिलकर EOW के दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूत किया।
- 2015 में दर्ज एक केस में खुद को बचाने के लिए विभागीय जानकारी में बदलाव कराया।
अग्रिम जमानत क्यों खारिज हुई?
हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। इससे पहले विशेष कोर्ट ने भी पूर्व AG वर्मा की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस स्तर के अधिकारियों द्वारा कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करना बेहद गंभीर अपराध है।
अब इस फैसले के बाद सतीश चंद्र वर्मा की गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है और EOW की कार्रवाई तेज हो सकती है।





