छत्तीसगढ़ में इस गणतंत्र दिवस पर मस्जिदों में तिरंगे की लहराहट एक नया इतिहास रचेगी। राज्य वक्फ बोर्ड ने सभी मुतवल्लियों को सर्कुलर जारी कर मस्जिदों के मुख्य द्वार पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का फरमान सुनाया है। यह कदम राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का हिस्सा है, जहां बोर्ड ने कहा कि देश की आजादी में मुसलमानों का योगदान याद रखना जरूरी है। लेकिन सिर्फ झंडा ही नहीं, मस्जिदों में राष्ट्रीय पर्व पर सेमिनार और संगोष्ठी आयोजित करने के लिए बोर्ड आर्थिक मदद भी देगा, ताकि युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ा जा सके।
बोर्ड के चेयरमैन ने सर्कुलर में स्पष्ट किया कि 26 जनवरी को हर मस्जिद में राष्ट्रगान और झंडारोहण अनिवार्य होगा। मुतवल्लियों को निर्देश है कि वे स्थानीय प्रशासन से समन्वय करें और कार्यक्रम की फोटो-वीडियो बोर्ड को भेजें। सेमिनार के लिए 5,000 से 10,000 रुपए तक की सहायता मिलेगी, जो आवेदन पर निर्भर करेगी। यह पहल पिछले साल की सफलता पर आधारित है, जब कुछ मस्जिदों में ऐसे आयोजन हुए थे। बोर्ड का कहना है कि इससे साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ेगा और गलतफहमियां दूर होंगी।
यह फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां लोग इसे एकता का प्रतीक बता रहे हैं। विपक्ष ने इसे सकारात्मक कदम कहा, लेकिन कुछ ने राजनीतिक एंगल भी जोड़ा। वक्फ बोर्ड ने अपील की कि सभी मुसलमान इस मौके पर देशभक्ति दिखाएं। क्या यह पहल पूरे राज्य में एक नई परंपरा बनेगी? अपडेट के लिए बने रहें।

