गरियाबंद: पद के अधिकारों और लंबित भुगतान की मांग को लेकर कोपरा की महिला सरपंच योगेश्वरी साहू, महिला पंच और ग्रामीणों के साथ कलेक्टोरेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई हैं। सरपंच के साथ खड़े ग्रामीणों का आरोप है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कोपरा का विकास ठप पड़ा है।
कलेक्टोरेट परिसर में नहीं मिली अनुमति
कैंपस में बैठने की अनुमति न मिलने के कारण सरपंच को ट्रैक्टर-ट्राली पर धरना देना पड़ रहा है। सरपंच योगेश्वरी साहू ने बताया कि 6 अक्टूबर 2023 को पंचायत को नगर पंचायत बनाया गया था। दो महीने तक पंचायत मद से ग्राम विकास के काम कराए गए, लेकिन विधिवत नगर पंचायत सीएमओ को चार्ज दिया गया। सरपंच और पंचों को नगर पंचायत का बॉडी बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को शामिल कर एक संचालन समिति बना दी गई।
15 लाख रुपये का भुगतान लंबित
विकास कार्यों पर खर्च किए गए 15 लाख रुपये का भुगतान भी नहीं किया गया है। लेबर और मटेरियल का भुगतान करने के लिए जब लोग नगर पंचायत जाते हैं तो उन्हें सरपंच के घर भेज दिया जाता है। यहां तक कि यह भी कहा जाता है कि सरपंच अपना घर-बाड़ी बेचकर भुगतान करेंगी।
हाई कोर्ट का आदेश भी नजरअंदाज
अपने अधिकारों के लिए सरपंच योगेश्वरी साहू ने अन्य 11 पंचों के साथ मिलकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने भी माना कि कोपरा नगर पंचायत में नियम विरुद्ध समिति बनाई गई है और 28 अगस्त को फैसला सरपंच के पक्ष में आया। लेकिन नगर पंचायत प्रशासन ने अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया है।

