छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। मैनपुर ब्लॉक के मूड़ागांव में चचरा पारा स्थित प्राथमिक स्कूल का भवन जर्जर होने के बावजूद, विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके चलते, विद्यालय की एकमात्र शिक्षिका, गुनो बाई ने अपना पीएम आवास स्कूल के लिए दे दिया और खुद अपने बेटे के साथ झोपड़ी में रहने लगीं।
यह घटना पिछले तीन सालों से चल रही है। इस दौरान, विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। गांव के पंच, कपूर चंद मांझी ने बताया कि 1997 में बने स्कूल भवन की मरम्मत के लिए 2006 में 4.18 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी। लेकिन, काम शुरू होने के बाद अचानक बंद हो गया और आज तक पूरा नहीं हो सका है।
2022 में, ‘स्कूल जतन योजना’ के तहत 1997 के जर्जर भवन के मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की स्वीकृति मिली। लेकिन, यह काम भी शुरू नहीं हो सका। आरईएस विभाग के एसडीओ, उमेस चौधरी का कहना है कि “विषम भौगोलिक परिस्थिति” के कारण काम शुरू नहीं हो सका।
यह मामला गरियाबंद जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक ज्वलंत उदाहरण है। एक तरफ, सरकार शिक्षा के लिए योजनाएं बना रही है, लेकिन दूसरी तरफ, जर्जर स्कूल भवनों की अनदेखी की जा रही है। इसके चलते, गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
इस मामले में, कांग्रेस विधायक, जनक ध्रुव ने भी शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि “स्कूल जतन योजना” में बड़ी अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद, शिक्षा विभाग ने जांच के लिए एक टीम गठित की है।