रायपुर। जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद जहां देशभर में करदाताओं और आम लोगों को राहत मिली है और जीएसटी कलेक्शन लगातार बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ जैसे उत्पादन-प्रधान राज्यों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कम उपभोग, अधिक उत्पादन और पुराने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कारण राज्य को इस वित्तीय वर्ष में करीब 1500 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है।
जीएसटी एक गंतव्य आधारित कर प्रणाली है, जिसमें कर का लाभ उपभोग वाले राज्य को मिलता है। छत्तीसगढ़ में स्टील, आयरन और कोयले का उत्पादन अधिक है, लेकिन उपभोग कम होने से राजस्व प्रभावित हो रहा है। खासकर कोयला सेक्टर में पहले 5% जीएसटी और 18% इनपुट टैक्स के कारण कंपनियों के पास ITC जमा हो गया, जिसका उपयोग अब किया जा रहा है, जिससे नकद राजस्व घट रहा है।
इसी तरह की स्थिति ओडिशा और झारखंड में भी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कमी का असर राज्य की विकास और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है और सुधार की संभावना 2027-28 के बाद ही है।

