रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत चिन्हित 17 अस्पतालों का स्वास्थ्य विभाग की राज्य स्तरीय टीम ने निरीक्षण किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने इन अस्पतालों को ‘वेरी हाई रिस्क’ श्रेणी में रखा था। जांच के दौरान मरीजों को दिए गए उपचार और योजना के तहत किए गए दावों से संबंधित दस्तावेज जुटाए गए हैं।
जांच के दायरे में रायपुर के 7, बिलासपुर के 3 और दुर्ग के 2 अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल का निरीक्षण किया गया। फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाने और मरीजों से नकद राशि लेने जैसी शिकायतों के आधार पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एकत्र किए गए रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा और निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। इससे पहले जांच दल की अनुशंसा पर रायपुर के मेडलाइफ और लोटस अस्पताल को आयुष्मान योजना से डी-इंपेनल किया गया था।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों की जोखिम श्रेणी और निरीक्षण अपने आप में अनियमितता का अंतिम निष्कर्ष नहीं है। आगे की कार्रवाई दस्तावेजों की जांच के परिणामों के आधार पर तय की जाएगी।



