मुख्य बिंदु
• हाईकोर्ट का निर्णय: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जबरन धर्मांतरण रोकने वाले होर्डिंग्स को असंवैधानिक नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि बल, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन गंभीर चिंता का विषय है।
• PIL खारिज: ईसाई संगठनों की जनहित याचिका खारिज। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले ग्राम सभा या SDM से शिकायत करें। होर्डिंग्स हटाने से इनकार।
• धार्मिक स्वतंत्रता पर टिप्पणी: अनुच्छेद 25 स्वतंत्रता देता है, लेकिन जबरन परिवर्तन का अधिकार नहीं। मिशनरी गतिविधियां कभी-कभी धर्मांतरण का साधन बनीं।
पृष्ठभूमि
• घटना: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक के घोटिया, कुडल, पारवी, जुनवानी, हवेचुर, मुसुरपुट्टा और सुलंगी जैसे गांवों में ग्राम सभाओं ने PESA कानून के तहत होर्डिंग्स लगाए। इनमें पादरी, पास्टर और ईसाई प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई, ताकि सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा हो।
• याचिका: ईसाई संगठनों ने होर्डिंग्स को भेदभावपूर्ण बताते हुए PIL दायर की। मांग: तत्काल हटाना और ग्राम पंचायत पर कार्रवाई। कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के बाद खारिज की। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की बेंच ने फैसला सुनाया।
• कोर्ट का तर्क: होर्डिंग्स सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए हैं, घृणा नहीं फैलाते। जबरन धर्मांतरण रोकना संवैधानिक। याचिकाकर्ता ग्राम सभा या SDM से संपर्क करें।
प्रभाव
• राजनीतिक बहस: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विवाद तेज। BJP इसे सांस्कृतिक रक्षा बता रही, जबकि विपक्ष भेदभाव का आरोप। PESA कानून के दुरुपयोग पर सवाल।
• व्यापक संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने भी जबरन परिवर्तन पर चिंता जताई। कई राज्यों में एंटी-कन्वर्जन कानून लागू। यह फैसला ग्रामीण स्तर पर स्वायत्तता मजबूत करेगा।