रायपुर। IDFC फर्स्ट बैंक के अधिकारियों पर रायपुर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए गैर-मौजूद जमीन बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में रायपुर के नवनीत चौरसिया की शिकायत पर बैंक के CEO (मुंबई), ऋण वसूली प्रभाग के अधिकारी (चेन्नई), स्वपनील पाण्डेय (नागपुर), और विनय सोनी (रायपुर) सहित अन्य के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471/34, और 120बी के तहत डीडी नगर थाने में FIR दर्ज की गई है।
ई-नीलामी में जीती थी संपत्ति, निकली फर्जी
नवनीत चौरसिया ने बताया कि IDFC फर्स्ट बैंक ने अखबार में विज्ञापन देकर खसरा नंबर 364/5 और 364/21 की दो संपत्तियों की ई-नीलामी कराई। उन्होंने इस नीलामी में हिस्सा लेकर 5.52 लाख रुपये का भुगतान किया और बोली जीत ली। इसके तहत उन्होंने 1000 और 850 वर्गफुट की संपत्तियों के लिए क्रमशः 1,17,000 और 1,10,000 रुपये डीडी के जरिए तथा 3,25,000 रुपये बैंक खाते में जमा किए।
असल मालिक निकले कोई और
28 फरवरी 2023 को सौदा पत्र मिलने के बाद, 5 मार्च को जैसे ही नवनीत ने समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित करवाई, आलोक महावार नामक व्यक्ति ने आपत्ति जताई। जांच में सामने आया कि जिन जमीनों की बोली नवनीत ने जीती थी, वे अशोक चंद बैद और राहुल अवधिया के नाम दर्ज हैं। बैंक ने नवनीत को मूल दस्तावेज देने से इनकार कर दिया और उन्हें गुमराह करता रहा।
कोर्ट के आदेश पर FIR, दस्तावेज नहीं देने पर गहराया शक
जब बैंक की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो नवनीत ने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर डीडी नगर पुलिस ने फर्जीवाड़ा, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है।

