Site icon India & World Today | Latest | Breaking News –

कमरछठ 2026: संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है यह व्रत, जानें महत्व और पूजा विधि

रायपुर। हिंदू धर्म में संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पर्व कमरछठ, जिसे हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों में महिलाएं इस दिन संतान की सलामती और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं।

क्यों खास है कमरछठ?

कमरछठ भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान बलराम और षष्ठी माता की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से संतान की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

व्रत में रखा जाता है विशेष नियम

कमरछठ के व्रत में कई तरह के विशेष नियमों का पालन किया जाता है। परंपरा के अनुसार व्रती महिलाएं हल से जुते खेत में उगे अनाज और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करतीं। इस दिन बिना जुते स्थान पर उगे खाद्य पदार्थों और स्थानीय परंपरा के अनुसार तैयार किए गए पकवानों का महत्व माना जाता है।

पूजा में पसहर चावल का महत्व

कमरछठ के अवसर पर पसहर चावल का विशेष महत्व होता है। इसे बिना हल चलाए या प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले धान से जुड़ी पारंपरिक मान्यता के कारण व्रत में शामिल किया जाता है। छत्तीसगढ़ में कमरछठ के दिन पसहर चावल से बने व्यंजन विशेष रूप से बनाए और ग्रहण किए जाते हैं।

कैसे होती है पूजा?

इस दिन महिलाएं सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। घर में पूजा स्थल तैयार कर षष्ठी माता और भगवान बलराम की पूजा की जाती है। पूजा में पारंपरिक रूप से फल, फूल, प्रसाद और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद महिलाएं व्रत कथा सुनती हैं और संतान की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

मां और संतान के रिश्ते का पर्व

कमरछठ केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि मां और संतान के बीच प्रेम और ममता को भी दर्शाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। छत्तीसगढ़ में यह पर्व पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है और कई जगहों पर महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करती हैं।

बदलते समय में भी कायम है परंपरा

आधुनिक जीवनशैली के बावजूद कमरछठ की परंपरा आज भी लोगों के बीच अपनी खास पहचान बनाए हुए है। नई पीढ़ी भी इस पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और आगे बढ़ाने में रुचि ले रही है। यही वजह है कि कमरछठ आज भी छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और पारिवारिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

Exit mobile version