छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस नेता कवासी लखमा को बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करोड़ों रुपये के शराब घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे बदले की भावना से प्रेरित बताया है।
कौन हैं कवासी लखमा?
कवासी लखमा छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से ताल्लुक रखते हैं, जो राज्य का सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। लखमा कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन अपने आदिवासी जीवन के अनुभव से उन्होंने राजनीति में पहचान बनाई।
- राजनीतिक सफर:
- 1998 में पहली बार कोंटा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।
- इसके बाद 2003, 2008, 2013, और 2018 में भी विधायक बने।
- 2018 में भूपेश बघेल सरकार में उन्हें आबकारी मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।
- व्यक्तिगत जीवन:
लखमा ने खुद को एक गरीब परिवार से उठकर राजनीति में पहुंचने वाला बताया। उन्होंने कहा था कि भगवान ने उन्हें बुद्धि दी है, जिससे वे अपने कार्यकाल में सभी जिम्मेदारियों को निभा पाए।
शराब घोटाला क्या है?
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में यह शराब घोटाला करीब 2000 करोड़ रुपये का है। ईडी ने लखमा के बेटे हरीश कवासी और दो करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच में मिले सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
सुर्खियों में क्यों रहते हैं कवासी लखमा?
- नक्सली हमले में बचाव:
2013 में सुकमा जिले की दरभा घाटी में कांग्रेस काफिले पर हुए नक्सली हमले में लखमा जीवित बचने वाले एकमात्र व्यक्ति थे। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल, और विद्या चरण शुक्ल सहित 27 लोग मारे गए थे। इस घटना के बाद बीजेपी ने उनका नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी। - विवादित बयान:
लोकसभा चुनाव के दौरान बस्तर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रहते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिस पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
भविष्य की राजनीति पर असर
कवासी लखमा की गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव को और बढ़ा दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले का राज्य की राजनीति और आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ेगा।

