बिलासपुर। रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर का जल्द ही कायाकल्प होने जा रहा है। इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। 150 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से मंदिर परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं
इस परियोजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रवेश द्वार, सुगम आवागमन, आधुनिक पेयजल, शौचालय, पार्किंग और पर्यटकों के ठहरने की सुविधा प्रदान की जाएगी। साथ ही, मंदिर परिसर का सुंदरीकरण और प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी।
केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में योजना पर चर्चा
केंद्रीय शहरी एवं आवास राज्य मंत्री तोखन साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। परियोजना की निगरानी राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (NBCC) करेगा। इस योजना का उद्देश्य रतनपुर को धार्मिक पर्यटन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
महामाया मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
रतनपुर का गौरवशाली इतिहास राजा रत्नदेव प्रथम से जुड़ा है, जिन्होंने इसे अपनी राजधानी बनाया था। यहां स्थित महामाया मंदिर प्राचीन वैभव और धार्मिक महत्व का केंद्र है। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस पवित्र स्थल के दर्शन के लिए आते हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मां महामाया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आशीष सिंह ने कहा कि महामाया मंदिर कॉरिडोर न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाएगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान भी देगा। यह परियोजना राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और आर्थिक विकास में सहायक होगी।