महासमुंद जिले के मांझी आदिवासी किसान सैनिकों ने वन विभाग की जमीन पर पेड़ काटकर झोपड़ी बना ली थी। सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर इन आदिवासियों को समझाइश देकर छोड़ दिया। हालांकि, जिन लोगों ने पेड़ों की कटाई की है, उन पर विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मांझी आदिवासी किसान सैनिक परसराम ध्रुव का कहना है कि वे लोग बेहद गरीब और भूमिहीन आदिवासी हैं। वे मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन उनके पास कोई काम नहीं है। उन्होंने साल 2023 में प्रशासन और वन विभाग को आवेदन देकर पट्टा देने की मांग की थी, ताकि वे खेती करके अपना जीवनयापन कर सकें। लेकिन प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, जिसके बाद 35 गांवों (मोगरा, मुस्की, जोबा, झलप, घोघी बहरा, सोरिद, मोहकम, साल्हेभाठा आदि) के करीब 200 आदिवासी परिवार कक्ष क्रमांक 61 में पेड़ काटकर झोपड़ी बना रहे थे।
वनमण्डलाधिकारी पंकज राजपूत ने बताया कि आदिवासी किसान सैनिक नियमों का उल्लंघन करते हुए कक्ष क्रमांक 61 में कुछ पेड़ों को काटकर झोपड़ी बनाने का प्रयास कर रहे थे। सूचना मिलने पर 17 आदिवासियों को मौके से उठाकर लाया गया था, जिसमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। समझाने पर वे लोग मान गए और उन्हें वापस छोड़ दिया गया। हालांकि, कुछ पेड़ कटे हैं, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, कलेक्टर से बातचीत कर इन आदिवासियों को पात्रता अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।