महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन पर्वों में से एक है। यह दिन आत्मशुद्धि, साधना और शिव भक्ति का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं।
महाशिवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। वहीं कुछ ग्रंथों में इसे शिव के ब्रह्मांडीय स्वरूप के प्राकट्य का दिन भी बताया गया है। यह पर्व हमें संयम, त्याग और आत्मबोध का संदेश देता है।
शुभ मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ समय)
महाशिवरात्रि पर निशिता काल में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है। इस समय किया गया अभिषेक और मंत्र जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु चार प्रहर में पूजा करते हैं।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और बेलपत्र अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। शाम को दीप प्रज्वलित कर रुद्राभिषेक करें और रात्रि जागरण में भजन-कीर्तन करें।
पौराणिक कथा
कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण कर सृष्टि की रक्षा की थी। उसी स्मृति में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इसी दिन शिव-पार्वती विवाह की कथा भी प्रचलित है।