रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने मनीषा खरे को हिंदी विषय में पीएच.डी. (विद्या वाचस्पति) की उपाधि प्रदान की है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के आदिवासी जनजीवन और उनके संघर्षों पर केंद्रित विषय पर अपना शोधकार्य सफलतापूर्वक पूरा किया।
मनीषा खरे ने “छत्तीसगढ़ के आदिवासी जनजीवन पर केंद्रित हिंदी उपन्यासों में अभिव्यक्त आदिवासी संघर्ष” विषय पर शोध किया। उनके अध्ययन में आदिवासी समाज के जनजीवन, जीवन-संस्कृति, सामाजिक सरोकारों, संघर्षों और अनुभवों की हिंदी साहित्य में अभिव्यक्ति का विश्लेषण किया गया है।
शोध में हिंदी उपन्यासों के माध्यम से आदिवासी समाज की चेतना, अस्मिता, अस्तित्व-बोध और संघर्षशील जीवन-दृष्टि को समझने का प्रयास किया गया है। यह अध्ययन हिंदी साहित्य में आदिवासी विमर्श को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
उन्होंने अपना शोधकार्य शोध निर्देशक डॉ. सविता मिश्रा, पूर्व प्राचार्य, शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजिम, जिला गरियाबंद के मार्गदर्शन में पूरा किया। उनके शोधकार्य का शोध-केंद्र शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर रहा।

