रायपुर/बीजापुर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने छत्तीसगढ़ में सेना के जवान की लक्षित हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को बीजापुर जिले के माओवादी कैडर आशु कोरसा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। यह मामला फरवरी 2024 में कांकेर जिले के अमाबेड़ा क्षेत्र के उसेली गांव में भारतीय सेना के जवान मोतीराम अचला की निर्मम हत्या से जुड़ा है, जिसे माओवादियों ने मेले के दौरान गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था।
माओवादी संगठन की साजिश का हुआ खुलासा
एनआईए द्वारा दायर की गई चार्जशीट के अनुसार, आरोपी आशु कोरसा प्रतिबंधित आतंकी संगठन सीपीआई (माओवादी) के उत्तर बस्तर डिवीजन के कुयेमारी क्षेत्र समिति का सक्रिय सदस्य था। उसने अपने एक वरिष्ठ माओवादी नेता के साथ मिलकर मोतीराम अचला की पहचान की और उस पर हमले की साजिश रची। 25 फरवरी 2024 को जब मोतीराम अचला अपने परिवार के साथ मेले में गया था, उसी दौरान उसे टारगेट कर सशस्त्र माओवादियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
चार्जशीट में दर्ज गंभीर धाराएं
एनआईए ने आरोपी के खिलाफ जागदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में IPC की धारा 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक साजिश) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [UAPA] की धारा 16, 18, 20, 38 और 39 के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इन धाराओं के तहत आरोपी को कड़ी सजा हो सकती है, जिसमें आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक शामिल है।
एनआईए ने संभाली थी जांच
इस मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही थी, लेकिन 29 फरवरी 2024 को इसकी गंभीरता को देखते हुए एनआईए ने केस अपने हाथ में ले लिया। विस्तृत जांच के दौरान पता चला कि आशु कोरसा न सिर्फ साजिश में शामिल था, बल्कि उसने हत्या की योजना में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। आरोपी को एनआईए ने दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया था।
दहशत फैलाना था मकसद
एनआईए ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों के प्रति लोगों का विश्वास डगमगाना और स्थानीय जनमानस में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करना था। माओवादी संगठनों की यह रणनीति लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में देखने को मिलती रही है, जहां वे आतंक का माहौल बनाकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश करते हैं।
अगला कदम: अन्य साजिशकर्ताओं की तलाश
एनआईए का कहना है कि इस मामले में जांच अभी भी जारी है और अन्य संदिग्धों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यह संभावना है कि इस साजिश में कई और माओवादी कैडर और नेता शामिल रहे होंगे, जिनकी भूमिका को चिन्हित किया जा रहा है।

