रायपुर। हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि “मैं और मेरा परिवार, देश के कारण है”, इसलिए समाज और राष्ट्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने भाषा, भूषा, भजन, भवन, भ्रमण और भोजन को अपनी संस्कृति से जोड़ने तथा स्वबोध के साथ जीवन जीने का आह्वान किया।
संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संकटों की चर्चा नहीं, उनके समाधान पर ध्यान देना चाहिए। समाज में एकता, पारिवारिक समय, मंगल संवाद और नशामुक्त जीवन पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण के लिए जल बचाने, सिंगल यूज प्लास्टिक छोड़ने और पेड़ लगाने की अपील की।
उन्होंने मातृभाषा के प्रयोग, संविधान के अध्ययन और संस्कारों के पालन पर भी जोर दिया। सम्मेलन में संत असंग देव महाराज ने संगठन की शक्ति, संत कबीर और चाणक्य के विचारों का उल्लेख करते हुए परस्पर प्रेम और एकता को राष्ट्र निर्माण की नींव बताया।