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20 साल पुराना ज़मीन घोटाला उजागर, जमीन खाली करने का आदेश

रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में एक बड़े भूमि घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग स्थित नवदुर्गा फ्यूल पावर लिमिटेड को राजस्व विभाग ने 23 एकड़ जमीन 15 दिनों के भीतर खाली करने का आदेश दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी ने बीते दो दशकों से कोटवारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब आवेदिका सुलोचनी चौहान ने शिकायत दर्ज कराई कि सराईपाली स्थित खसरा नंबर 395-2, रकबा 0.955 हेक्टेयर कोटवारी भूमि पर कंपनी द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। यह भूमि शासन द्वारा उन्हें गुजर-बसर के लिए दी गई थी।

जांच में यह सामने आया कि आवेदिका के पति स्व. बसंत लाल चौहान ने वर्ष 2005 में एक सहमति पत्र के तहत उक्त भूमि को नवदुर्गा फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था, जबकि बदले में कंपनी द्वारा अन्य भूमि देने और एक लाख रुपये भुगतान की बात कही गई थी। लेकिन यह सहमति पत्र न तो वैधानिक था और न ही कोई आधिकारिक तबादला कार्रवाई पूरी की गई थी। दी गई भूमि मौके पर खाली भी पाई गई।

2008 में पूर्व कोटवार बसंत चौहान के निधन के बाद उनकी पत्नी सुलोचनी को कोटवार नियुक्त किया गया। उन्होंने बताया कि यह भूमि उनका आय का मुख्य स्रोत थी, लेकिन कब्जे के कारण वे 21 वर्षों से खेती नहीं कर सकीं और उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान हुआ। उन्होंने 80 लाख रुपये का मुआवजा और भूमि को मुक्त कर उन्हें सौंपने की मांग की।

राजस्व विभाग की जांच में नवदुर्गा फ्यूल पावर लिमिटेड के कब्जे की पुष्टि होने पर कंपनी को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जमीन खाली करने का आदेश दिया गया है।

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