चैत्र नवरात्रि का छठा दिन माँ माँ कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कात्यायनी साहस, शक्ति और धर्म की प्रतीक मानी जाती हैं।
क्या है धार्मिक महत्व?
मान्यता है कि महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा। देवी ने महिषासुर जैसे राक्षस का वध कर धर्म की रक्षा की थी।
पूजा विधि
इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर पीले या लाल वस्त्र धारण करते हैं। माता को पुष्प, रोली, चंदन, धूप-दीप अर्पित कर विशेष पूजा की जाती है। देवी को शहद या मिठाई का भोग लगाया जाता है, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या चढ़ाएं भोग?
माँ कात्यायनी को शहद का भोग विशेष प्रिय माना जाता है। इससे जीवन में मधुरता और सुख-समृद्धि आती है।
क्या मिलते हैं फल?
माना जाता है कि माँ कात्यायनी की पूजा से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। साथ ही, जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आध्यात्मिक संदेश
नवरात्रि का छठा दिन हमें यह सिखाता है कि साहस और संयम के साथ जीवन की कठिनाइयों का सामना करना चाहिए। देवी की आराधना से नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

