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बस्तर में नक्सलवाद अंतिम दौर में, सरेंडर बढ़ने से संगठन कमजोर

बस्तर। बस्तर में दशकों से चला आ रहा नक्सलवाद अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है और इसके अंत की संभावनाएं तेज हो गई हैं। शीर्ष कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद संगठन को बड़ा झटका लगा है, वहीं सूत्रों के मुताबिक मिशिर बेसरा भी सरेंडर के लिए संपर्क में हैं।

पिछले दो वर्षों में करीब 5000 नक्सली नेटवर्क खत्म हुआ है, जिसमें 3000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 2000 गिरफ्तार हुए और 500 मारे गए। सरकार की पुनर्वास नीति और विकास कार्यों का इसमें अहम योगदान रहा है।

इस लंबे संघर्ष में 1416 जवान शहीद हुए, जबकि आईईडी के 1277 मामलों में नुकसान हुआ। हालांकि सुरक्षा बलों ने 4580 आईईडी बरामद कर कई बड़ी घटनाओं को टाल दिया।

अब बचे हुए नक्सलियों के सामने आत्मसमर्पण या कार्रवाई का सामना करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बस्तर में अब शांति और विकास की दिशा में नई शुरुआत होती दिखाई दे रही है।

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