सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में नक्सलियों द्वारा निगरानी और हमलों की साजिश के लिए ड्रोन इस्तेमाल करने की पुष्टि पहली बार हुई है। 23 फरवरी 2025 को सुकमा के गुंडराजगुडेम जंगल में पुलिस ने सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के एक ठिकाने से दैनिक सामग्री के साथ एक ड्रोन जब्त किया। अफसरों के अनुसार यह ड्रोन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के काम में इस्तेमाल होने वाला मॉडल था, जिसकी रेंज लगभग 3 किलोमीटर है।
पहली बार मिला ड्रोन, लंबे समय से थी गतिविधि की आशंका
सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने ड्रोन मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कई महीनों से पुलिस कैंपों और आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध ड्रोन देखे जा रहे थे, लेकिन फरवरी 2025 में पहली बार भौतिक रूप से ड्रोन जब्त किया गया। यह घटना नक्सल गतिविधियों के तकनीकी विस्तार की ओर इशारा करती है।
NIA को पहले से था इनपुट, जून 2024 में मिला था सुराग
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जून 2024 में छत्तीसगढ़ पुलिस को इनपुट दिया था कि नक्सली ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह जानकारी तेलंगाना पुलिस द्वारा पकड़े गए तीन सहयोगियों से मिली थी, जिनमें से एक बीजापुर (छत्तीसगढ़) का निवासी था।
इन आरोपियों ने तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को ड्रोन सप्लाई करने की बात स्वीकार की थी। इससे नक्सल नेटवर्क के तकनीकी रूप से सशक्त होने की पुष्टि हुई।
विशाल सिंह ने खोले कई राज
29 जून 2024 को NIA ने दिल्ली से मथुरा निवासी विशाल सिंह को गिरफ्तार किया था, जिसने पूछताछ में कबूल किया कि वह पिछले सात वर्षों से नक्सलियों को ड्रोन सप्लाई कर रहा था और उन्हें प्रशिक्षित भी करता था। उसने बिहार के छकरबंदा-पचरुखिया वन क्षेत्र में माओवादी नेताओं को ड्रोन संचालन में एक्सपर्ट बनाया था।
इससे पहले अगस्त 2024 में हरियाणा और पंजाब की माओवादी इकाई से जुड़े अजय सिंघल उर्फ अमन को भी गिरफ्तार किया गया था।
10 ड्रोन की आशंका, किस कमेटी के पास—जांच जारी
NIA अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों के पास एक या दो नहीं, बल्कि करीब 10 ड्रोन होने की संभावना है। ये ड्रोन किस एरिया कमेटी के नियंत्रण में हैं, यह जानने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। अभी तक इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बस्तर में नक्सलियों पर दबाव: 426 से ज्यादा ढेर
बस्तर में जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच 426 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं, जिनमें से 136 महिला नक्सली थीं। मुठभेड़ों में मारे गए नेताओं में माओवादी महासचिव बसवा राजू, सेंट्रल कमेटी के 4 सदस्य और स्टेट कमेटी के 16 वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं। सबसे ज्यादा नक्सली 281 दंडकारण्य क्षेत्र में मारे गए।

