रायपुर: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में तहसीलदार अनुज पटेल के निलंबन को लेकर प्रदेशभर के तहसीलदारों में भारी आक्रोश है। राज्यभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने इस निलंबन के खिलाफ आंदोलन का मन बना लिया है। उन्होंने कलेक्टर नम्रता गांधी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर, उन्हें पद से हटाने की मांग की है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की एक वर्चुअल बैठक में लिया गया, जिसमें तहसीलदार और नायब तहसीलदार शामिल हुए। बैठक के बाद संघ का एक प्रतिनिधिमंडल राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेगा।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 11 सितंबर को रायपुर के कमिश्नर महादेव कावरे ने धमतरी जिले के बेलरगांव में पदस्थ तहसीलदार अनुज पटेल को निलंबित कर दिया। निलंबन का कारण मुख्यालय से अनुपस्थित रहना और शासकीय कार्यों में अपेक्षित प्रगति न होना बताया गया। कमिश्नर के निलंबन आदेश में कलेक्टर नम्रता गांधी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन का भी उल्लेख किया गया है, जो इस कार्रवाई का आधार बना।
तहसीलदार संघ की आपत्ति और आक्रोश:
तहसीलदार संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीलमणि दुबे ने निलंबन को अनुचित बताया है। उनके अनुसार, अनुज पटेल ने अपनी आंखों के ऑपरेशन के लिए एसडीएम से तीन दिनों का अवकाश लिया था और इसकी सूचना कलेक्टर नम्रता गांधी को भी फोन पर दी थी। इसके बावजूद उन्हें निलंबित कर दिया गया, जिसे तहसीलदार संघ ने अन्यायपूर्ण करार दिया है। संघ का कहना है कि निलंबन से पहले न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही तहसीलदार का पक्ष सुना गया, जो प्रक्रिया का उल्लंघन है।
आंदोलन की चेतावनी:
संघ की यह भी मांग है कि कलेक्टर नम्रता गांधी को तत्काल पद से हटाया जाए। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो पूरे प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। संघ के अनुसार, यह मामला न केवल एक व्यक्ति के निलंबन का है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन और कर्मचारियों के अधिकारों के हनन का भी है।
इस मामले ने राज्यभर के तहसीलदारों में रोष उत्पन्न कर दिया है, और यदि जल्द ही समाधान नहीं निकाला गया, तो राज्य के प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

