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रायपुर में शिक्षा का घोटाला: सरकारी स्कूली किताबें रद्दी में मिलीं, जांच के आदेश

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी स्कूलों के लिए खरीदी गई हजारों किताबें रद्दी के ढेर में मिली हैं। यह मामला तब सामने आया जब रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने सिलयारी स्थित रियल बोर्ड पेपर मिल के गोदाम में छापा मारा।

क्या है पूरा मामला?

विधायक उपाध्याय के अनुसार, गोदाम में उन्हें बड़ी संख्या में नई स्कूली किताबें मिलीं जो अभी भी पूरी तरह से अच्छी स्थिति में थीं। इन किताबों को छात्रों को वितरित करने के बजाय रद्दी के रूप में बेच दिया गया था। यह घटना इसलिए और चौंकाने वाली है क्योंकि इन किताबों को सरकार ने छात्रों को मुफ्त में वितरित करने के लिए खरीदा था।

सरकार ने गठित की जांच कमेटी

इस मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। इस गंभीर मामले को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के प्रबंध संचालक आईएएस राजेंद्र कटारा की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति इस पूरे मामले की गहनता से जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करेगी।

विधायक उपाध्याय का आरोप

विधायक उपाध्याय ने इस घटना को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा घोटाला बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

विधायक ने किया प्रदर्शन

विधायक उपाध्याय ने इस मामले को लेकर गोदाम के सामने अपने समर्थकों के साथ धरना भी दिया। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में नहीं देंगे और सरकार से मांग करेंगे कि वह इस पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

क्या हैं इस मामले के मायने?

यह मामला शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक गंभीर उदाहरण है। यह दिखाता है कि कैसे कुछ लोग बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करके अपना स्वार्थ पूरा कर रहे हैं। इस मामले से यह भी पता चलता है कि सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन में कितनी लापरवाही बरती जाती है।

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