रायपुर। राजधानी रायपुर में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी है। महादेवघाट स्थित निर्धारित विसर्जन कुंड में 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1 बजे तक मां दुर्गा की 790 प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका था। श्रद्धालुओं की सुविधा और नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम ने विशेष इंतजाम किए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खारुन नदी में सीधे दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं किया जा सकेगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के अनुरूप प्रतिमाओं को निर्धारित विसर्जन कुंड में ही विसर्जित करना अनिवार्य है।
विसर्जन के बाद सफाई पर विशेष जोर
नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने विसर्जन स्थल की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए अधिकारियों की समिति गठित की है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिमाओं के विसर्जन से पहले पूजा सामग्री को अलग करके निर्धारित स्थान पर रखा जाए। इसके अलावा कुंड में विसर्जन के बाद जमा होने वाले मलबे, बांस-बल्लियों और अन्य अवशेषों को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य विसर्जन स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने के साथ खारुन नदी के जल को प्रदूषित होने से बचाना है। प्रशासन ने ध्वनि और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं
विसर्जन कुंड पर आने वाले लोगों की सुविधा के लिए शामियाना, रोशनी, ध्वनि विस्तारक यंत्र, अग्निशमन वाहन और चिकित्सा सहायता जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि विसर्जन प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सके।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते समय पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। निर्धारित कुंड में प्रतिमाओं का विसर्जन और समय पर सफाई जैसे कदम नदी को प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


