रायपुर: राजधानी रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाला ‘मास्टर प्लान 2031’ खुद ही अव्यवस्थाओं के जाल में फंस गया है। पिछले 2 सालों से मास्टर प्लान की बड़ी गड़बड़ियों में सुधार नहीं हो पाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शहर के ट्रैफिक को राहत देने के लिए प्रस्तावित 12 नई एमआर (Master Road) सड़कों पर अब तक काम शुरू होना तो दूर, जमीन पर एक पत्थर भी नहीं रखा गया है।
फाइलों में कैद 12 मास्टर रोड
मास्टर प्लान के तहत रायपुर के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों को जोड़ने के लिए 12 प्रमुख सड़कों (MR) का जाल बिछाया जाना था। इन सड़कों का उद्देश्य शहर के मुख्य मार्गों पर बढ़ते दबाव को कम करना था।
• जमीन पर जीरो काम: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) और नगर निगम के बीच समन्वय की कमी के कारण इन सड़कों का सीमांकन तक नहीं हो पाया है।
• अतिक्रमण की भेंट: जिन जगहों से सड़कें गुजरनी हैं, वहां तेजी से अवैध निर्माण और प्लॉटिंग हो रही है, जिससे भविष्य में सड़क बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
2 साल से नहीं सुधरीं गड़बड़ियां
मास्टर प्लान लागू होने के बाद हजारों आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिनमें प्रमुख थीं:
1. गलत लैंड यूज (Land Use): कई रिहायशी इलाकों को कमर्शियल और कमर्शियल को ग्रीन बेल्ट दिखा दिया गया है।
2. नक्शों में खामियां: पुराने गांवों और नई कॉलोनियों के बीच सड़कों का जुड़ाव कागजों पर तो है, लेकिन धरातल पर वहां मकान बन चुके हैं।
3. सुधार का इंतजार: विभाग ने सुधार का आश्वासन तो दिया था, लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी गजट नोटिफिकेशन और बदलाव की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है।
बिल्डर्स और जनता परेशान
मास्टर प्लान क्लियर न होने की वजह से नए प्रोजेक्ट्स के ले-आउट पास होने में दिक्कत आ रही है। वहीं, आम जनता को अपनी ही जमीन पर निर्माण की अनुमति लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

