रायपुर। रायपुर नगर निगम में ट्रांसफर आदेशों की अनदेखी से प्रशासनिक अव्यवस्था चरम पर है। निगम के कुछ अधिकारी अपने पसंदीदा कर्मचारियों को बचाने की कोशिश में न केवल सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं, बल्कि निगम के कोष पर भी अनावश्यक भार डाल रहे हैं। हालात यह हैं कि एक ही पद पर दो-दो कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है, जबकि जिन नगर निगमों में इन अधिकारियों का पदस्थापन किया गया है, वहां महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी वर्षों से रायपुर में पदस्थ थे और ट्रांसफर होने के बावजूद रिलीविंग नहीं ले रहे। वहीं, उनकी जगह आए नए कर्मचारी रायपुर में ज्वाइन कर चुके हैं। इस स्थिति ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप ने कहा कि ट्रांसफर के मामलों पर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है और अभी अंतिम निर्णय लंबित है। वहीं अपर आयुक्त कृष्णा खटीक का कहना है कि कई पद खाली हैं फिर भी उन पर वेतन दिया जा रहा है। कुछ अधिकारी इस मामले को लेकर कोर्ट भी चले गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे भ्रष्टाचार और संरक्षणवाद का मामला बताया। उन्होंने कहा कि एक पद पर दो कर्मचारियों को वेतन देना जनता के पैसे की बर्बादी है। निगम पहले से वित्तीय संकट से जूझ रहा है और ऐसे में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है। जिन नगर निगमों में अधिकारी नहीं पहुंचे हैं—कोरबा, जगदलपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव—वहां काम ठप पड़ा है और लोग पूछ रहे हैं कि अब जिम्मेदारी कौन निभाएगा?इस मुद्दे पर रायपुर महापौर मीनल चौबे से की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।