राजधानी रायपुर के कुख्यात सूदखोर और हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी लेकिन सीमित राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने रोहित तोमर की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि यह राहत केवल 4 विशिष्ट मामलों में ही प्रभावी होगी, जबकि उसके खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में दर्ज दर्जनों अन्य मामलों में तलवार अब भी लटकी हुई है।
16 से ज्यादा केस: शिकायतों का अंबार
रोहित तोमर और उसके भाई वीरेंद्र तोमर पर रायपुर के तेलीबांधा, पुरानी बस्ती और सिविल लाइन सहित कई थानों में 16 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में शामिल हैं:
• अवैध वसूली (Extortion): कारोबारियों को डरा-धमकाकर करोड़ों की मांग।
• सूदखोरी: उधारी के बदले 10 गुना तक ब्याज वसूलना और ब्लैंक चेक लेकर दबाव बनाना।
• जमीन कब्जा और मारपीट: अवैध हथियारों के दम पर संपत्तियों पर कब्जा और विरोध करने पर मारपीट।
• आर्म्स एक्ट: तलाशी के दौरान घर से अवैध हथियार और संदिग्ध दस्तावेज मिलना।
पुलिस की कार्रवाई और फरारी
रायपुर पुलिस ने पिछले कई महीनों से तोमर बंधुओं के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ छेड़ रखी है। वीरेंद्र तोमर को पहले ही मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया जा चुका है और उसका शहर की सड़कों पर ‘जुलूस’ भी निकाला गया था। रोहित तोमर लंबे समय से फरार चल रहा है और पुलिस ने उस पर इनाम भी घोषित कर रखा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस ताज़ा आदेश के बाद रायपुर पुलिस अब उन मामलों की सूची तैयार कर रही है जिनमें रोहित को राहत नहीं मिली है, ताकि उन केसेस के आधार पर उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जा सके।