Roop Chaudas 2026: दीपावली के पांच दिवसीय पर्व में रूप चौदस का विशेष महत्व है। इसे नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि रूप चौदस के दिन विधि-विधान से पूजा और दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है।
रूप चौदस का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध कर हजारों महिलाओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसी वजह से इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
क्यों मनाई जाती है रूप चौदस?
रूप चौदस को सौंदर्य और स्वच्छता से भी जोड़कर देखा जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और शरीर पर उबटन लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से सौंदर्य में निखार आता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। महिलाएं विशेष रूप से इस दिन सजने-संवरने और घर को सजाने की तैयारियां करती हैं।
रूप चौदस पर क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थल को सजाएं।
- भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा करें।
- शाम के समय घर के बाहर दीपक जलाएं।
- परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
यम दीपदान का महत्व
रूप चौदस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर भगवान यमराज की कृपा बनी रहती है।
रूप चौदस का पर्व हमें स्वच्छता, सुंदरता, स्वास्थ्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। इस दिन से दीपावली की रौनक और उत्सव का माहौल और भी बढ़ जाता है।

