छत्तीसगढ़, जिसे अक्सर “धान का कटोरा” कहा जाता है, अब सिर्फ धान के लिए ही नहीं जाना जाता है। राज्य में युवाओं की एक बढ़ती हुई संख्या है जो परंपरागत खेती को त्यागकर, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए फूलों की खेती अपना रहे हैं।
कम लागत, अधिक मुनाफा:
गुलाब की खेती, कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल के रूप में उभर रही है। यह न केवल अन्य फसलों की तुलना में अधिक आय प्रदान करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरक क्षमता को भी बनाए रखती है, क्योंकि इसमें कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता है।
युवाओं का रुझान:
महासमुंद के अमर चंद्राकर, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी, गांव लौटकर गुलाब की खेती में आधुनिक प्रयोग करने का फैसला किया। उन्हें सरकार की बागवानी योजना से अनुदान और तकनीकी सहायता मिली। आज, वह रायपुर, मुंबई, नागपुर, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों में अपनी गुलाब, झरबेरा और सेवंती के फूलों की आपूर्ति करते हैं।
आधुनिक तकनीक का उपयोग:
जगदलपुर के किसान सुदर्शन पाटिल, पॉलीहाउस में आधुनिक तकनीक का उपयोग करके गुलाब की खेती करते हैं। एक एकड़ में 30,000 गुलाब के पौधे लगाए जाते हैं, जिनमें से प्रत्येक साल 25-30 फूल देता है।
बाजार में भारी मांग:
भारतीय फूल उद्योग में गुलाब, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, एंथुरियम, कार्नेशन और गेंदा जैसे फूलों की भारी मांग है। फूलों की खेती अत्याधुनिक पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस दोनों में की जा सकती है।
लाभ:
- कम लागत
- अधिक मुनाफा
- मिट्टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि
- कीटनाशकों का उपयोग नहीं
- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
- पूरे साल फूलों की उपलब्धता
छत्तीसगढ़ में फूलों की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो किसानों, खासकर युवाओं के लिए एक आकर्षक और लाभदायक व्यवसाय बन रहा है। आधुनिक तकनीकों और सरकारी सहायता के साथ, यह क्षेत्र और भी अधिक विकास की ओर अग्रसर है।

