सतपुड़ा टाइगर रिजर्व ने जानकारी दी है कि उनके द्वारा हाल ही में एक घायल बाघ का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है। यह पुरुष बाघ, जो अपने प्राइम में था, को लगभग एक महीने पहले लंगड़ाते हुए देखा गया था। घायल होने के कारण कमजोर हो चुका यह बाघ जंगल में खतरे में था। वन विभाग को उसकी पीड़ा देखकर तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।
सतपुड़ा के घने जंगलों में बाघ को ढूंढना आसान काम नहीं था। लहरदार इलाकों में टाइगर लुक-आउट टीमों को लगातार बाघ का पता लगाने के लिए प्रयास करना पड़ा। आखिरकार, आज सुबह, बाघ को शांत किया गया और उसका इलाज किया गया। पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से पता चला कि उसकी कोई हड्डी नहीं टूटी है, लेकिन उसे मांसपेशियों में क्षति हुई थी। इलाज के बाद बाघ को जंगल में छोड़ दिया गया। वन विभाग को उम्मीद है कि वह एक या दो महीने में पूरी तरह ठीक हो जाएगा।

इस सफल बचाव अभियान में वन विभाग (एफडी) की टीम ने अथक परिश्रम किया। श्री एल कृष्णमूर्ति, वरिष्ठ अधिकारी, पशु चिकित्सा दल, हाथी और महावत, और कई अन्य फील्ड स्टाफ ने इस बाघ को बचाने के लिए दिन-रात काम किया। स्कूल ऑफ फॉरेंसिक एंड वाइल्डलाइफ हेल्थ जबलपुर और डब्ल्यूसीटी मुंबई से पशु चिकित्सकों की टीम ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
