भिलाई | 05 जुलाई 2026 | छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाली और पद्म विभूषण से सम्मानित देश की मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला जगत और पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक कला ‘पंडवानी’ (महाभारत की कहानियों का गायन) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊंचाई दी थी।
नाना से मिली थी महाभारत सुनाने की प्रेरणा
तीजन बाई के पंडवानी गायन के सफर की कहानी बेहद दिलचस्प है। बचपन में उन्हें अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते और सुनाते देखने का मौका मिला। नाना की इसी कला ने नन्हीं तीजन को इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने इसे ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। उस दौर में जब महिलाओं के लिए मंच पर आकर प्रस्तुति देना बेहद कठिन माना जाता था, तीजन बाई ने तमाम सामाजिक बंधनों को तोड़कर पंडवानी सीखने और उसे प्रस्तुत करने की ठान ली।
13 साल की उम्र में पहली बार आईं मंच पर
तमाम विरोधों और संघर्षों के बीच, तीजन बाई ने महज 13 साल की उम्र में पहली बार सार्वजनिक मंच पर आकर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने दुर्ग जिले के चंदखुरी गांव में एक अस्थाई मंच पर जब तंबूरा हाथ में लेकर खड़े होकर (कापालिक शैली) पंडवानी गाई, तो वहां मौजूद हर कोई उनकी दमदार आवाज और अभिनय कला का कायल हो गया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और देश ही नहीं, बल्कि पेरिस, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे दुनिया के बड़े शहरों में पंडवानी की गूंज पहुंचाई।
कला जगत की अपूरणीय क्षति, राष्ट्रपति और पीएम ने जताया शोक
तीजन बाई के निधन को लोक कला संस्कृति के एक सुनहरे युग का अंत माना जा रहा है। उनके निधन पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गजों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कला क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और फिर देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्व विभूषण’ से नवाजा था।
राजकीय सम्मान के साथ होगी अंतिम विदाई
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की इस महान विभूषण को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां कला प्रेमी, राजनेता और आम जनता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। उनके जाने से खाली हुआ यह स्थान कला जगत में कभी भरा नहीं जा सकेगा, लेकिन उनका तंबूरा और उनकी बुलंद आवाज हमेशा लोगों के दिलों में अमर रहेगी।

