Teejan Bai : छत्तीसगढ़ की पंडवानी गायन विधा को वैश्विक पहचान दिलाने वाली डॉ. तीजन बाई की हालत गंभीर बनी हुई है। 78 वर्षीय पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित इस महान कलाकार ने अब बात करना भी बंद कर दिया है। उनकी आवाज, जिसने कभी हजारों तालियां बटोरीं, अब खामोश हो चुकी है।
पंडवानी के लिए समर्पित जीवन
दुर्ग जिले के गनियारी गांव की रहने वाली तीजन बाई ने पारधी समाज से होते हुए पंडवानी गायन को अपना जीवन समर्पित किया। उनकी अनूठी कापालिक शैली में पांडवों की कथा सुनाने की कला ने उन्हें देश-विदेश में प्रशंसा दिलाई। उनके जीवन पर शोध और फिल्में बनने की योजना रही है, लेकिन बीते डेढ़ साल से वे लकवे के कारण बिस्तर पर हैं।
इलाज और आर्थिक संकट
तीजन बाई को केंद्र सरकार से 4,366 रुपये की पेंशन मिलती है, लेकिन यह राशि उनके इलाज के भारी खर्च के आगे अपर्याप्त है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। बहन की बहू वेणु देशमुख उनकी देखभाल करती हैं और इलाज का खर्च तीजन बाई की जमा पूंजी से उठाया जा रहा है।
राज्य सरकार से नहीं मिली मदद
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 24 साल बाद भी तीजन बाई को राज्य सरकार से कोई पेंशन या सहायता योजना का लाभ नहीं मिल सका है। यह स्थिति उन कलाकारों के प्रति उदासीनता को दर्शाती है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
भूली नहीं कैमरे की चमक
हालांकि, गंभीर स्थिति में भी तीजन बाई कैमरे के सामने फोटो खिंचवाना नहीं भूलतीं और इशारों से लोगों का अभिवादन करती हैं। उनके बीमार होने की खबर एक महीने तक छिपाई गई थी, क्योंकि उनके नाम से मिलने वाली पंडवानी कार्यक्रमों की आय पर परिवार निर्भर था।
भूपेश सरकार ने लिया था संज्ञान
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उनके स्वास्थ्य के लिए डॉक्टरों की टीम नियुक्त की थी। बीएसपी के पंडित जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल में भी उनका इलाज हुआ, लेकिन उनकी हालत में कोई बड़ा सुधार नहीं हो पाया।



