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तीजन बाई का ऐतिहासिक तंबूरा संग्रहालय में नहीं जाएगा, परिवार ने संस्कृति विभाग का प्रस्ताव ठुकराया

दुर्ग। पद्म विभूषण से सम्मानित दिवंगत पंडवानी गायिका तीजन बाई का ऐतिहासिक तंबूरा अब संग्रहालय में नहीं रखा जाएगा। उनके परिवार ने संस्कृति विभाग के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि यह तंबूरा केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि तीजन बाई के संघर्ष, साधना और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का प्रतीक है।

हाल ही में संस्कृति विभाग की टीम गनियारी स्थित उनके कौशल्या निवास पहुंची थी और तंबूरे को संग्रहालय में संरक्षित करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख ने साफ कहा कि यह धरोहर परिवार के पास ही सुरक्षित रहेगी। उन्होंने बताया कि तीजन बाई के पोते सूरज पंडवानी गायन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए यह तंबूरा परिवार की विरासत के रूप में घर में ही रहेगा।

परिवार ने सुझाव दिया है कि संस्कृति विभाग संग्रहालय के लिए तंबूरे की प्रतिकृति (डुप्लीकेट) तैयार करवा सकता है। वहीं, गनियारी स्थित कौशल्या निवास में एक छोटा संग्रहालय विकसित किया जाएगा, जहां तीजन बाई की साड़ियां, पारंपरिक आभूषण, ऐतिहासिक तंबूरा और अन्य स्मृति चिह्न संरक्षित किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन और योगदान को करीब से जान सकें।

उल्लेखनीय है कि पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर एम्स में निधन हो गया था। लोककला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया था।

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