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ग्राम पुजारी परिवार की बहुएं शादी के बाद से ही क्यों पहनती हैं सफेद लिबास?

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ब्लॉक के कोसमी गांव में रहने वाले ग्राम देवी के पुजारी ध्रुव आदिवासी परिवार की बहुएं शादी के बाद से ही सफेद लिबास पहनती हैं। यह परंपरा पिछले सात पीढ़ियों से चली आ रही है। माना जाता है कि यह देवी का श्राप है।

परिवार के मुताबिक, उनके पूर्वज, जो ग्राम के पुजारी हुआ करते थे, देवी उन्हें महिला की वेश में आकर रोजाना खाना खिलाया करती थीं। एक दिन पुजारिन ने छिपकर देखा कि देवी ही उनके पति को खाना खिला रही हैं। इसके बाद गुस्से में देवी ने परिवार को श्राप दे दिया कि उनकी बहुएं सुहागन की तरह दिखेंगी तो शारीरिक कष्ट झेलेंगी।

इस श्राप के डर से परिवार की सभी बहुएं, शादी के बाद से ही सफेद साड़ी, कांसे की चूड़ी और मंगलसूत्र पहनकर रहती हैं। वे सिंदूर, टीका, बिछिया और अंगूठी नहीं पहन सकतीं। यहां तक कि रंगीन कपड़े भी पहनने की उन्हें मनाही है।

परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे हरि ध्रुव का कहना है कि यह अंधविश्वास जरूर लगता है, लेकिन यह अब उनकी आस्था बन गया है। उनकी पत्नी ललिता का कहना है कि गांव में उन्हें कोई नहीं कहता, लेकिन बाहर लोगों की जिज्ञासा शांत करना पड़ता है।

हालांकि, परिवार के कुछ युवा सदस्य इस प्रथा को बदलना चाहते हैं। 6वीं पीढ़ी के बेटे का कहना है कि यह प्रथा अब पुराणी हो चुकी है और इसे बदलने का समय आ गया है। लेकिन परिवार के बड़े सदस्य का कहना है कि वे इस प्रथा को नहीं बदल सकते क्योंकि यह देवी का श्राप है।

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