रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। सूबे के कई जिलों में हजारों की संख्या में सरकारी स्कूली किताबें कबाड़ में मिली हैं। यह खुलासा कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने किया है।
उपाध्याय के अनुसार, ये किताबें इसी शैक्षणिक सत्र 2024-25 की हैं, जिन्हें स्कूली बच्चों में वितरित किया जाना था। लेकिन इन किताबों को स्कूलों तक पहुंचाए जाने की बजाय रद्दी के भाव में बेचकर सिलयारी स्थित एक पेपर मिल में पहुंचा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।
सरकारी विभाग की लापरवाही:
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी सहित पांच अधिकारियों को जांच का जिम्मा सौंपा है। हालांकि, कांग्रेस ने इस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जांच का जिम्मा उसी विभाग को दिया गया है जिसने इन किताबों को छपवाया था। इसके अलावा, जांच दल में शामिल पांच सदस्यों में से दो पर भी आरोप हैं।
कांग्रेस की मांग:
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया जाए। पार्टी का मानना है कि इस तरह की गंभीर घटना में केवल विभागीय जांच से सच सामने नहीं आ पाएगा।