नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों में बसे बोटेर गांव में इस बार स्वतंत्रता दिवस का नजारा ऐतिहासिक रहा। जिस गांव में कभी नक्सली फरमान के कारण तिरंगा फहराना मुश्किल था, वहां पहली बार ग्रामीणों और ITBP की 29वीं वाहिनी के जवानों ने पूरे उत्साह के साथ तिरंगा फहराया।
कभी नक्सलियों के प्रभाव वाले बोटेर और गुंडेकोट में राष्ट्रीय पर्व के दौरान काला झंडा लगाने का दबाव रहता था। ग्रामीण लंबे समय तक भय के माहौल में जीते रहे। सुरक्षा अभियान और नए पुलिस कैंप की स्थापना के बाद क्षेत्र में हालात बदले हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीणों और बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाए। बच्चों के चेहरों पर खुशी और ग्रामीणों में उत्साह नजर आया। बोटेर में लहराता तिरंगा अब नक्सल खौफ से आजादी और क्षेत्र में लौटते विश्वास का प्रतीक बन गया है।


