रायपुर, 22 नवंबर 2025: हिंदी साहित्य के महान कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य जगत का सर्वोच्च सम्मान 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली न जा सकने पर पुरस्कार उनके रायपुर स्थित निवास पर प्रदान किया गया। भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आरएन तिवारी ने शुक्रवार को सम्मान समारोह में उन्हें प्रशस्ति पत्र, शाल, श्रीफल और 11 लाख रुपये का चेक सौंपा। यह छत्तीसगढ़ के किसी साहित्यकार को मिलने वाला पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार है।
88 वर्षीय विनोद कुमार शुक्ल, जिन्हें ‘शब्दों के जादूगर’ कहा जाता है, का जन्म 1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव में हुआ। राजनांदगांव जिला मुख्यालय के पास चाकन भाठागांव में पले-बढ़े शुक्ल ने ‘नौकर की कमीज’, ‘देहमंदिर’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’ जैसी कृतियों से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999), व्यास सम्मान (2008) और पद्म श्री (2021) भी मिल चुके हैं। उनकी रचनाएं सादगी, संवेदना और सामाजिक यथार्थ से ओतप्रोत हैं।
सम्मान समारोह में भावुक होकर शुक्ल ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि नई पीढ़ी हर भाषा का सम्मान करेगी। हर विचारधारा का सम्मान करेगी। किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है।” उन्होंने पाठकों और साहित्य प्रेमियों का आभार जताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर बधाई दी, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “शुक्ल जी का सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान है।” साहित्यिक हलकों में खुशी की लहर, कई संगठनों ने बधाई सभा आयोजित की। पुरस्कार 2024 के लिए घोषित, लेकिन स्वास्थ्य के चलते विलंब से प्रदान।

