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ज्ञानपीठ से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन: 89 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, रायपुर एम्स में चल रहा था इलाज

रायपुर, 23 दिसंबर 2025: हिंदी साहित्य जगत को आज बड़ा झटका लगा। प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले 21 दिनों से रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती थे, जहां गंभीर श्वसन रोग, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD), निमोनिया, टाइप-2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप से जूझ रहे थे। 1 5

1937 में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्ल ने हिंदी साहित्य को अपनी सरल, संवेदनशील और प्रयोगधर्मी शैली से समृद्ध किया। मध्यवर्गीय जीवन, लोक आख्यानों और दैनिक संघर्षों को चित्रित करने वाली उनकी रचनाएं अनूठी हैं। प्रमुख कृतियों में पहला कविता संग्रह ‘लगभग जयहिंद’ (1971), उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ (1979), ‘खिलेगा तो देखेंगे’ (1996) और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ (1997) शामिल हैं। 5

उन्हें 2024 में 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार (समग्र साहित्य पर) मिला, जो उनके जीवन का सर्वोच्च सम्मान था। इसके अलावा साहित्य अकादमी पुरस्कार (‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए), मुक्तिबोध फेलोशिप, रजा पुरस्कार, शिखर सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान, मातृभूमि पुरस्कार (2020) और साहित्य अकादमी महत्तर सदस्य (2021) जैसे अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए। 5

हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एम्स जाकर उनका हालचाल जाना था। साहित्यिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है, जहां कई लेखक-कवियों ने उन्हें ‘हिंदी का गांधी’ करार दिया। उनका पार्थिव शरीर एम्स से राजनांदगांव ले जाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार होगा। साहित्य प्रेमी उनके योगदान को सदा याद रखेंगे। अपडेट के लिए बने रहें।

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