छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग कभी जो इलाका नक्सलवाद और हिंसा की वजह से जाना जाता था, आज वह अपनी खूबसूरती, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और शांति की वजह से एक नए रूप में देश-दुनिया के सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और विशेष नीतियों की बदौलत बस्तर से अब नक्सलवाद की काली छाया तेजी से छंट रही है, जिसके बाद यहां पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास देखने को मिल रहा है।
पर्यटन और ‘बस्तर 2.0’ का नया ब्लूप्रिंट
राज्य सरकार के प्रयासों से बस्तर अब सिर्फ संघर्ष का क्षेत्र नहीं, बल्कि एक प्रमुख टूरिस्ट हब के रूप में विकसित हो रहा है। सरकार द्वारा लाए गए ‘बस्तर 2.0’ और पर्यटन कॉरिडोर के तहत बस्तर के दूरदराज इलाकों में कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। नए पुल-पुलियों, सड़कों के निर्माण और बेहतर रेल-हवाई मार्ग के साथ पर्यटकों का पहुंचना आसान हुआ है। इसके अलावा, धुरंधर और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में होमस्टे (Homestay) और इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सैलानी स्थानीय संस्कृति, खान-पान और लोकनृत्य से सीधे रूबरू हो रहे हैं।
युवाओं के लिए खुल रहे रोजगार के द्वार
शांति बहाली और पर्यटन के इस नए दौर से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के ढेरों अवसर पैदा हो रहे हैं:
- होमस्टे योजना: ग्रामीण परिवारों को होमस्टे के जरिए जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिल रहा है।
- टूरिज्म मैनेजमेंट: स्थानीय युवाओं को पर्यटन प्रबंधन और गाइडिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे इस सेक्टर में आगे बढ़ सकें।
- स्थानीय हस्तशिल्प और कला को बाजार: बस्तर की लोककला, हस्तशिल्प और बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजनों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, जिससे पारंपरिक कलाकारों की आमदनी भी बढ़ी है।
बस्तर की यह बदलती तस्वीर इस बात की गवाही दे रही है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही दिशा में उठाए गए कदमों से किस तरह किसी क्षेत्र की तकदीर बदली जा सकती है। अब बस्तर की पहचान उसके अतीत के संघर्षों से नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक छटा, शांति और विकास की नई उड़ान से हो रही है।



