बिलासपुर | 05 जुलाई 2026 | छत्तीसगढ़ में नया शिक्षण सत्र शुरू हुए हफ्ता बीत चुका है, लेकिन बिलासपुर जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चे अब भी बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों के हाथों में नई पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। दरअसल, इस बार किताबों की छपाई 70-80 GSM (कागज की मोटाई का पैमाना) के तकनीकी विवाद में फंस गई है। इस गंभीर लेटी-लतीफी पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने सफाई देते हुए कहा है कि इस तकनीकी पेच को सुलझा लिया गया है और जल्द ही स्कूलों में किताबों का डिस्ट्रीब्यूशन शुरू कर दिया जाएगा।
70-80 GSM का क्या है विवाद जिसने रोका रास्ता?
इस बार सरकारी स्कूलों में बांटी जाने वाली किताबों के पन्नों की क्वालिटी को लेकर एक नया नियम लागू किया गया था। शासन स्तर पर यह तय हुआ था कि किताबों की छपाई 70 से 80 GSM के उच्च गुणवत्ता वाले कागज पर की जाएगी ताकि वे साल भर फटने से बची रहें। लेकिन प्रिंटर्स और शिक्षा विभाग के बीच इसी GSM की जांच और मापदंडों को लेकर विवाद छिड़ गया। पन्नों की मोटाई और क्वालिटी चेकिंग की इस कागजी प्रक्रिया में इतना लंबा वक्त लग गया कि सत्र शुरू होने तक छपाई और सप्लाई का काम समय पर पूरा नहीं हो सका।
खाली बस्ते लेकर स्कूल पहुंच रहे नौनिहाल
किताबों की कमी का सबसे सीधा और बुरा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बाद जब बच्चे बड़े उत्साह के साथ नई कक्षाओं में पहुंचे, तो उन्हें पुरानी किताबों या फिर ब्लैकबोर्ड के भरोसे ही बैठना पड़ रहा है। कई स्कूलों में शिक्षक पुरानी जमातों के बच्चों से ली गई कबाड़ हो चुकी किताबों से जैसे-तैसे सिलेबस आगे बढ़ा रहे हैं। पालकों का कहना है कि सत्र के शुरुआती दिनों में ही अगर पढ़ाई पिछड़ जाएगी, तो आगे चलकर बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा।
DEO का दावा: जल्द होगा संकट का समाधान
इस अव्यवस्था को लेकर जब बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से बात की गई, तो उन्होंने माना कि तकनीकी कारणों से सप्लाई चेन में थोड़ी देरी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यालय स्तर से हरी झंडी मिल चुकी है और किताबों के बंडल ब्लॉक स्तर पर पहुंचने शुरू हो गए हैं। DEO ने भरोसा दिलाया है कि आगामी 3 से 4 दिनों के भीतर जिले के सभी प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में शत-प्रतिशत किताबों का वितरण सुनिश्चित कर दिया जाएगा, ताकि बच्चों की नियमित पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।


