बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मुस्लिम कानून के तहत हिबा (उपहार) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि केवल गिफ्ट डीड का पंजीयन हो जाने से हिबा वैध नहीं माना जा सकता। इसके लिए दानकर्ता की घोषणा, प्राप्तकर्ता की स्वीकृति और संपत्ति के कब्जे की वास्तविक सुपुर्दगी जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने रायपुर के 1500 वर्गफीट के संपत्ति विवाद में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि गिफ्ट डीड में कब्जा सौंपने का उल्लेख था, लेकिन संपत्ति के करीब 370 वर्गफीट हिस्से पर वादी पक्ष लंबे समय से काबिज था। प्रतिवादी पूरी संपत्ति का वास्तविक कब्जा हस्तांतरित होने का ठोस प्रमाण नहीं दे सके।
हाई कोर्ट ने रायपुर जिला न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें गिफ्ट डीड को शून्य घोषित किया गया था। अदालत ने प्रथम अपील खारिज करते हुए कहा कि लंबे समय से शांतिपूर्ण कब्जे में रह रहे व्यक्ति को केवल विवादित दस्तावेज के आधार पर जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता।



