बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एमबीबीएस छात्रों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि यदि राज्य सरकार निर्धारित छह माह की समय-सीमा के भीतर नियुक्ति आदेश जारी नहीं करती है, तो अनिवार्य सेवा बांड स्वतः निरस्त माना जाएगा। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत ने सीआईएमएस बिलासपुर के चार एमबीबीएस स्नातकों की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि समय-सीमा समाप्त होने के बाद जारी नियुक्ति आदेश और काउंसलिंग प्रक्रिया प्रभावी नहीं मानी जाएगी। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को बिना किसी बांड राशि या दंड के तत्काल एनओसी जारी किया जाए। यह फैसला राज्य के अन्य समान परिस्थितियों वाले मेडिकल स्नातकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


