प्रदेश के उद्यानिकी विभाग में ‘प्रभार की खेती’: 11 जिलों में नियमित अफसर नहीं, 7 की डीपीसी 2 साल से अटकी

रायपुर: छत्तीसगढ़ के उद्यानिकी विभाग में व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक बड़ी खबर सामने आई है। विभाग में इन दिनों सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है, जिसे विभागीय गलियारों में ‘प्रभार की खेती’ का नाम दिया जा रहा है। आलम यह है कि प्रदेश के 11 जिलों में उद्यानिकी विभाग के पास एक भी नियमित अधिकारी नहीं है, और पूरा कामकाज सिर्फ प्रभारी अधिकारियों के कंधों पर टिका हुआ है। इसके साथ ही, लगभग 7 अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया भी पिछले दो सालों से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।

11 जिलों में प्रभार का राज

विभाग की लचर कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आधा दर्जन से अधिक जिलों में नियमित जिला उद्यानिकी अधिकारियों की पदस्थापना नहीं की गई है। प्रशासनिक अमले की कमी या प्रशासनिक सुस्ती के चलते इन जिलों में कनिष्ठ या अन्य जिलों के प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक प्रभारी व्यवस्था रहने से योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कसावट पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

दो साल से अटकी डीपीसी

एक तरफ जहां मैदानी अमले और जिलों में अफसरों का टोटा है, वहीं दूसरी ओर पात्र अधिकारियों की डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) पिछले दो साल से अटकी हुई है। प्रमोशन रुकने के कारण अधिकारियों में मायूसी और असंतोष का माहौल है। पदोन्नति प्रक्रिया पूरी न होने से वरिष्ठ पदों पर भी नियमित नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं, जिसका सीधा असर विभाग के नीतिगत निर्णयों और कामकाज पर पड़ रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर इस सुस्ती और लेटलतीफी के चलते न केवल शासकीय योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचने में बाधा आ रही है, बल्कि विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

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