गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आदिवासी अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आखिरकार रंग लाई। लगभग 60 घंटे तक चले धरने के बाद जिला प्रशासन ने आदिवासी नेताओं की 10 में से 6 मांगों को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद शुक्रवार रात एसडीएम पंकज डाहिरे ने मंच पर पहुंचकर जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म करवाई।
यह हड़ताल जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम की अगुवाई में बुधवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी। जैसे-जैसे दोनों नेताओं की तबीयत बिगड़ती गई, आदिवासी विकास परिषद का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर भगवान उईके से मिला और समाधान की दिशा में पहल की गई।
प्रमुख मांगों पर प्रशासन की सहमति:
- 13 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदला जाएगा – यह घोषणा 2 अक्टूबर को की जाएगी। इसके बाद इन गांवों को शासकीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
- अमलीपदर सुख तेल नदी पर रपटा निर्माण – पुल निर्माण में देरी के कारण बरसात में आवाजाही में दिक्कत होती थी। अब जिला प्रशासन किसी भी मद से रपटा निर्माण कराएगा।
- शुक्ला नाला में रपटा निर्माण, अड़गडी और जरहिडीह में पुल निर्माण शीघ्र – संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं।
- मैनपुर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी दूर – तीन नियमित डॉक्टरों की पोस्टिंग कर दी गई है।
- राजपड़ाव क्षेत्र में स्कूल भवनों का निर्माण और मरम्मत कार्य – जून तक पूरा कराने का निर्देश; लापरवाही पर ठेकेदार पर कार्रवाई की चेतावनी।
आंदोलन अभी स्थगित, खत्म नहीं – संजय नेताम
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने साफ किया कि आंदोलन को खत्म नहीं किया गया है, सिर्फ स्थगित किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा वादों को पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को फिर से शुरू किया जाएगा।
एसडीएम पंकज डाहिरे ने कहा कि प्रशासन ने 10 में से 6 मांगों पर सहमति जताई है और उन्हें प्राथमिकता में रखकर कार्यान्वित किया जाएगा। भूख हड़ताल को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया गया है।





