दुर्ग। जिले में बढ़ती गर्मी और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए 25 मई से 15 जून तक सभी ग्राम पंचायतों में “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान चलाया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश पर चयनित कुओं और बोरवेल में जलस्तर की माप कर उसका डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा।
अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता, जलस्तर में गिरावट और संभावित जल संकट का वैज्ञानिक आकलन करना है। सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल संकट प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि इस बार जलस्तर मापन केवल मेजरिंग टेप से किया जाएगा, ताकि आंकड़ों की शुद्धता बनी रहे। खास बात यह है कि सर्वे में सूखे कुओं को भी शामिल किया जाएगा। ऐसे कुओं की कुल गहराई दर्ज की जाएगी, जिसके लिए जलदूत एप में नया फीचर जोड़ा गया है।
यह सर्वे वर्ष में दो बार—प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून अवधि में किया जाएगा, जिससे बारिश के बाद भूजल स्तर में हुए बदलावों का तुलनात्मक अध्ययन संभव हो सकेगा।



